Roman Hindi Gujarati bengali tamil telugu malayalam

Friday, September 7, 2007

चैलेन्जः हिम्मत है तो एक फोल्डर बना कर दिखाएं


महोदय

आप सब को नमस्कार. मैं अपने कम्प्यूटर में एक फोल्डर बनाने की कोशिश करते-करते थक गया लेकिन con नाम से फोल्डर नहीं बना सका. अगर आप में दम है तो con नाम से फोल्डर बना कर दिखाएं यदि सफलता मिले तो उसके बनाने का तरीका बताएं और हो सके तो यह भी बताएं कि आखिर con नाम से फोल्डर साधारण तौर पर क्यों नहीं बनाया जा सकता है.

Tuesday, September 4, 2007

हीरा खदानों में अस्मत लुटाने को मजबूर अबला

चारों ओर हल्ला है कि महिलाओं की तस्वीर बदल रही है. लेकिन मेरे नजरिये से ऐसा कहने वाले तस्वीर का सिर्फ एक ही पहलू देख रहे हैं. यह सही है महिलाएं आज हर क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं कई मामलों में पुरुषों को भी पीछे छोड़ रही हैं लेकिन ग्रामीण भारत की स्थिति आज भी जस की तस है. यह अलग बात है कि कुछ एक महिलाएं अपवाद स्वरूप आगे आ रही हैं लेकिन संपूर्ण स्थितियों का यदि आकलन किया जाए तो आज भी हम उन्हीं पुरातन मान्यताओं के दायरे में उन्हें कैद पाते हैं. आज भी गांवों में महिलाएं शोषण और उत्पीड़न का शिकार हैं.
और तो और कई जगह तो महिलाओं की यह स्थिति है कि उन्हें उस व्यवस्था से गुजरना पड़ता है जिन्हें आज का समाज और कानून कहीं से मान्यता नहीं देता है.
भारत की सबसे प्रसिद्ध पन्ना की हीरा खदानों में महिला उत्पीड़न का नजारा सामान्यतौर पर देखने को मिल सकता है कुछ यही हालात चित्रकूट के तराई अंचल में चलने वाली खदानों के भी हैं. यहां की उथली हीरा खदानों में हजारों की संख्या में महिलाएं काम करती है. इन हीरा खदानों में शुरुआती चरण में जब खुदाई होती है और कठोर पत्थर निकलता है तब तक तो हालात सामान्य रहते हैं लेकिन जैसे ही खदान में भुरभुरा पर मिलता है तो महिलाओं की इज्जत का काला अध्याय यहां के स्थानीय ठेकेदार लिखना शुरू कर देते हैं. दरअसल भुरभुरी मिट्टी को छानने धोने की प्रक्रिया की जाती है क्योंकि इसी में हीरा मिलने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है. रोज शाम को जब मजदूर काम करके वापस जाने लगते हैं तो शुरू होता है इनकी तलाशी का दौर . इस दौरान बाकायदे सबको निर्वस्त्र करके तलाशी ली जाती है. चाहे वह पुरुष हो या महिला . और तलाशी लेने वाले ठेकेदार के आदमी होते हैं. महिला की तलाशी भी वही लेते है. अब कल्पना कीजीए कि इस दौरान महिला को किस स्थिति का सामना करना पड़ता होगा. कई बार तो तलाशी हैवानियत की हद तक पहुंच जाती है और तलाशी के नाम पर गुप्तांगों को भी नहीं बख्शा जाता. लेकिन अब यहां काम करने वाली महिलाएं इन सबकी आदी हो गई है. यहां शासन की रोजगार दिलाने की तमाम योजनाएं चलने के बाद भी वे इन तक नहीं पहुंच पा रही है और महिलाओं को इस प्रथा से मुक्ति नहीं मिल पा रही है. यहां काम करने वाला तबका ज्यादा तर वनवासी व आदिवासी है. जिसे शासन व उसकी योजनाओं का कोई ज्ञान नहीं है. कुछ यही हाल चित्रकूट के तराई क्षेत्र का है. यहां हर दिन महिलाओं की अस्मत से खेला जाता है. यहां काम करने वाली महिलाएं ज्यादातर ठेकेदार और उनके गुर्गों की हवस पूर्ति का साधन बन चुकी है. दरअसल यह क्षेत्र दस्यु प्रभावित है. यहां काम करने से सरकारी अमला डरता है और यदाकदा कोई सूचना मिलती भी है तो उसके निराकरण के लिये जाने से कतराता है. इसलिये यहां दैहिक शोषण जीवनशैली बन चुका है. और महिलाएं भी इसे अपने व्यवहार में शामिल कर चुकी हैं. हालात यहां इतने बदतर हैं कि इनके बच्चे बाहर खेल रहे होते हैं और अंदर झोपड़े में कोई इनकी अस्मत से खेल रहा होता है.
... अब इन परिस्थितियों को देख कर कौन कहेगा कि आज महिलाओं की तस्वीर बदल रही है. हां यह जरूर है तस्वीर का एक पहलू बदल रहा है .

भारत में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार न्यायाधीश के सामने


देश में यदि भ्रष्टाचार दूर करने की मुहिम शुरू हो तो उसमें सबसे बड़ी बाधा न्यायालय ही होगा. हमेशा अखबारों और न्यूज चैनलों में यह खबर प्रमुखता से दी जाती है कि विश्व के सर्वाधिक भ्रष्ट देशों में भारत फलां नम्बर पर... फिर बताया जाता है कि भारत में सर्वाधिक भ्रष्ट नेता हैं फिर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी हैं. लेकिन मेरी नजर में सबसे ज्यादा भ्रष्ट लोग न्यायालय के अंदर ही बैठे है. किसी भी लोवर कोर्ट में चले जाइए ... वहां बड़ी सहजता से खुले आम घूस लेते लोग आपको मिल जाएंगे. वो भी जज के सामने , लेकिन मजाल क्या किसी की कोई घूस देने से इंकार कर दे.अमूमन वादी - प्रतिवादी किसी को भी कोर्ट में अपनी पेशी बढ़वानी है या कोई दस्तावेज सम्मिलित करवाना है तो वहां कोर्ट के अंदर ही आपको वहां बैठे बाबू को पैसे देने ही होंगे. अपको किसी दस्तावेज की नकल लेना है तो पैसे देने ही होंगे. कोर्ट के रिकार्ड रूम से कोई दस्तावेज लेना है तो पैसे देने होंगे, कोई आवेदन लगाना हो तो पैसे लगेंगे. और यह सब जज के सामने ही खुलेआम होता है. क्या जज की निगाहें यहां नहीं जाती ....लेकिन मामला न्यायपालिका का है तो बोले कौन . फिर हम सुविधाभोगी हो ही चुके है, हमें आदत पड़ गई है गलत तरीके का पालन करने की तो फिर यहां सब जायज है. लेकिन मेरी नजर में भारत में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है तो वह है न्यायपालिका में वह भी जज के सामने लेकिन कभी यह मामला न तो लिखा गया न ही दिखाया गया......है कोई माई का लाल जो इस पर रोक लगाने की बात कर सके ...... लेकिन मुझमें तो नहीं है यह हिम्मत क्योंकि शायद मैं अकेला ही खड़ा नजर आउंगा .... और अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता.

Sunday, September 2, 2007

योग से डरे क्रूसेड के धर्मयोद्धा

भारत को अंग्रेजों ने भले ही सन् १९४७ में आजाद कर दिया हो लेकिन आज भी वे भारत व भारत वासियों को गुलामी की मानसिकता से ही देखते हैं. यही कारण है कि वे हमारे विकास को पचा नहीं पाते चाहे वह विकास आर्थिक , सामाजिक , वैज्ञानिक ,सांस्कृतिक या फिर धार्मिक हो.
इस बार इनका भय हमारी प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धि योग से है. हमारे ऋषि मुनियों ने मानव शरीर को स्वस्थ व स्फूर्ति से भरा बनाए रखने के लिये शरीर के लिये कुछ व्यायाम के तरीके खोजे . जिसके लाभदायी परिणाम का नतीजा है कि यह भारतीय योग आज पूरे विश्व में अपना परचम लहरा रहा है. पूरा विश्व इसकी पनाह में आ रहा है. इस बढ़ती प्रसिद्धि से मिशनरी को अपने धर्म पर खतरा मंडराता दिखाई देने लगा है. या फिर वे आज भी भारत के सांस्कृतिक तौर पर अपना गुलाम मानते हैं.
विगत दिवस इंग्लैंड के बैपटिस्ट चर्च और सेट जेम्स चर्च के पादरियों द्वारा चर्च में चल रहे योग अभ्यास केन्द्रों पर रोक लगाते हुए स्कूलों में भी योग सिखाने पर पाबंदी लगाने की घटना उनकी ओछी और कमजोर मानसिकता को ही दर्शाती है. यह कहना कि ईसाइयत के अनुसार योग का दर्शनशास्त्र झूठा है तथा योग गैर - धार्मिक कृत्य है यह ईसाईत की कौन सी सोच और परिभाषा है ... यह मेरे समझ के परे है. शायद ईसाईत इतनी कमजोर है कि उसे योग से अपनी चूले हिलती नजर आ रही हैं तो फिर इस धर्म के बारे में कुछ कहना बेमानी है. बहरहाल मेरे नजरिये से योग सिर्फ एक शारीरिक व्यायाम का कौशल है जो शरीर को निरोगी रखता है.
वहीं ईसाईत की बात करे तो उनके हिन्दुस्तान में जो कृत्य है वे वास्तव में उचित नहीं कहे जा सकते हैं. कई ऐसे मामले है जो सीधे धर्मान्तरण से जुड़े हैं. फिर भी योग पर प्रतिबंध यह बताता है कि क्रूसेड के धर्मयोद्धा कितने कमजोर हैं .

Tuesday, August 28, 2007

60 मिनट के विश्व रिकार्ड का दावा

जलयोग आचार्य लक्ष्मी यादव ने पानी में शरीर के किसी अंग को हिलाए बगैर सीधे 90 डिग्री के कोण में बिना हिले डुले विश्व में सर्वाधिक समय तक खड़े रहने का दावा किया है. विस्तृत देखें http://www.jalyog.blogspot.com/

Friday, August 3, 2007

जिस्मः एडल्ट न्यूज शो या कुछ और ...

अभी दो दिनों से टीवी जगत के एक बहुत बड़े खुलासे का दावा करते हुए IBN7 ने एक एडल्ट शो चलाया. सब कुछ मिलाकर उसका लब्बो-लुआब यह था कि आज कल पत्नियों की अदला-बदली मध्यम वर्ग में की जा रही है. ... अब जनाब IBN7 ने इसका ऐसा प्रस्तुतिकरण किया कि यह समझ में ही नहीं आया कि वह कहना क्या चाह रहा है या दिखाना क्या चाह रहा है. एक जगह एंकर बोलता है १० शहरों में हमारे संवाददाताओं का सर्वे है तो उसी समय नीचे पट्टी चल रही होती है अनगिनत जोड़े शामिल हैं- यदि सर्वे है तो आंकड़ा दें चाहे वह औसत प्रतिशत में हो. इसके अलावा आपने इसे एडल्ट शो घोषित करके कौन सी बहस छेड़ना चाहते है. बहस का मुद्दा तो आज यह है कि खबरों के प्रस्तुतिकरण का यह कौन सा तरीका है. इससे पहले भी अन्य चैनलों ने भी कई मुद्दे इस तरीके के उठाएं है लेकिन ऐसा प्रस्तुतिकरण नहीं दिखा. टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में पत्रकारिता का यह पतन बेहतर संकेत नहीं है. कुछ दिन बाद नैकेड न्यूज फार्म में भी बहस के नाम पर कुछ दिखा दें तो अब इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है. यदि वह बहस समाजशास्त्रियों व मनोवैज्ञानिकों में छेड़ना चाहते हैं तो मैं चाहूंगा कि बहस यहां भी छिड़े कि न्यूज चैनलों में आगे निकलने की ये जो होड़ और जो तरीका चला है क्या वह सही है?

Wednesday, August 1, 2007

पीपल के पत्ते से मोबाइल करें रीचार्ज !

इन दिनों सतना जिले में एक अनोखा प्रयोग छाया हुआ है. जिसे देखो वही अपने मोबाइल की बैटरी को पीपल के पत्ते से चार्ज करने में लगे है. और तो और इस प्रयोग के नतीजे भी 70 फीसदी तक सही साबित हो रहे है.
पीपल के पत्ते से मोबाइल की बैटरी रीचार्ज करने का तरीका बेहद आसान है. इसके लिये एक ताजा हरा पीपल का पत्ता लीजीए. दूसरी ओर अपने मोबाईल के पिछले हिस्से को खोलकर बैटरी बाहर निकाल लें. फिर पीपल के पत्ते का अगला सिरा (वह नहीं जिससे वह डाल से जुड़ता है) मोबाइल को बैटरी से जोड़ने वाले तीन पिन प्वाइंटों में से बीच वाले में छुला दे फिर पत्ते को लगाए हुए ही बैटरी को कनेक्ट कर दें. इस दौरान जो चक्र बनेगा उसमें मोबाइल और बैटरी तीन जोड़ने वाले पिन प्वाइंट आपस में जुडे तो रहेंगे लेकिन बीच वाले में पीपल के पत्ते की नोक भी बीच में होगी. फिर मोबाइल चालू करने पर आप पाएंगे कि मोबाइल की बैटरी कुछ ही पलों में चार्ज हो चुकी होगी या होने लगी होगी.
तो जनाब जब आप जंगल या ऐसी जगह है जहां बिजली न हो या चार्जर न हो तो बस एक अदद पीपल का पत्ता ढूढ़िये . आप का मोबाइल चार्ज हो जाएगा.
इस प्रयोग की शुरुआत जिले में म.प्र. -उ.प्र. सीमा के बीच स्थित चित्रकूट क्षेत्र से हुई. हालांकि अभी इस प्रयोग वनस्पति शास्त्री और रसायन शास्त्री दोनों हैरान है लेकिन इससे इनकार भी नहीं कर रहे. उनका मानना है कि यह वैज्ञानिक खोज का विषय है.
अब आप भी यह प्रयोग करें. मेरी कामना है आपको कामयाबी मिलेगी.