Roman Hindi Gujarati bengali tamil telugu malayalam

Sunday, August 17, 2008

विकसित राष्ट्र और हिन्दी का विकास

अमेरिका के पास सबसे ज्यादा पैसा है, आस्ट्रेलिया के पास सबसे ज्यादा यूरेनियम है, हर विकसित देश के पास पर्याप्त संसाधन हैं लेकिन भारत के पास पर्याप्त लोग है... अर्थात पर्याप्त मानव संसाधन हैं. लेकिन इनके लिये भारत में न तो पर्याप्त संसाधन हैं न अवसर.
अब बात करते हैं अपनी भाषा और उसके सशक्तिकरण की. हम हमेशा यही राग अलापते हैं कि हिन्दी को मजबूत करने के कोई प्रयास नहीं किये जा रहे तो मेरे एक मित्र सदैव यह उदाहरण देते हैं कि विदेशों में उन देशों की भाषा ही सर्वमान्य भाषा है वहां चपरासी से लेकर अधिकारी तक सभी एक ही भाषा में काम करते हैं. वहां पढ़ाई भी एक ही भाषा में होती है लेकिन भारत में ऐसा नहीं फिर इस पर लंबी बहस होती है और बात बेनतीजा हो कर अधूरी रह जाती है. काफी सोचने के बाद मेरा मानना है कि जब तक हम विकसित देश नहीं हो जाते तब तक हिन्दी पूरे देश की भाषा नहीं बन सकती चाहे इसके लिये हम कितने भी प्रयास कर लें या फिर कितने भी आयोजन कर लें.

अब हम बात करते हैं कि भारत की पूरी शिक्षा हिन्दी में क्यों नहीं होती तो मेरा मानना है कि चलिये हम पूरी शिक्षा हिन्दी में कर भी लेते हैं सारी किताबे हिन्दी में तैयार भी हो जाती हैं तकनीकी, चिकित्सा सहित सारी पढ़ाई हिन्दी में शुरू हो जाती है तो हासिल क्या होगा... इन परिस्थितियों में जो भी पेशेवर तैयार होंगे वे बेहतर हिन्दी तो जानेगें लेकिन उन्हे हम कितना रोजगार दे पाएंगे... क्या हमारे यहां इतनी व्यवस्थाएं हैं कि उन्हें हम अपने यहां खपा सकें... शायद नहीं. फिर ये बेहतर हिन्दी भाषी क्या बाहर रोजगार पा सकेंगे...

दूसरा क्या हमारे यहां इतने संसाधन हैं कि नित नई खोज अपने यहां अपनी भाषा में कर सकें... निश्चित तौर पर नहीं फिर हम हिन्दी भाषी अपने अल्पसंसाधनों व हिन्दी भाषा ज्ञान के माध्यम से बाहरी प्रणालियों से समन्वय बना सकेंगे... शायद नहीं

लोग कहते हैं विदेशों में जाने वाले लोगों को वहां की भाषा सीखनी पड़ती है तो भारत आने वाले क्यों नहीं सीखते हिन्दी... तो महाशय हम अभी विकास की उस प्रक्रिया से गुजर रहे हैं जहां लोग अभी आना शुरू किये हैं. यदि हम उन्हें अभी नहीं समझ पाएंगे या उन्हें नहीं समझा पाएंगे तो वे दूसरी ओर जाना शुरू कर देंगे... फिर हम उनपर हिन्दी लाद कर क्या हिन्दी का विकास कर सकेंगे...

आज हम गरीबी के साथ जीने वाले तथा कम रोजगार के अवसरों से घिरे देश में रह रहे हैं यदि हमने हिन्दी की चादर ओढ़ ली तो क्या हम रोजगार के बेहतर अवसर बाहर पा सकेंगे... शायद नहीं...

ऐसे कई मामले हैं जहां पूर्ण हिन्दी अपना लेने से हम नुकसान में रहेंगे. हां लेकिन जब हम विकसित राष्ट्र हो जाएंगे तथा हमारे मानव संसाधन पूर्ण संसाधन में बदल जाएंगे तो फिर हमें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. उस समय हम हिन्दी को लोगों की मजबूरी बना सकेंगे. तब हमारे पास मानव संसाधन को खपाने के पर्याप्त संसाधन होंने और उसका माध्यम होगी हमारी राष्ट्र भाषा हिन्दी...

इसलिये यदि हिन्दी को राष्ट्र भाषा तथा सर्वमान्य भाषा बनाना है तो हिन्दी के विकास के दिखावटी प्रयास बंद कर देश को विकसित राष्ट्र बनाने में जुटें. विकसित होते ही हिन्दी अपने आप राष्ट्र भाषा बन जाएगी.

Saturday, August 16, 2008

याहू मेल से beta हट गया

मैं जिस error से परेशान था दरअसल वह याहू द्वारा किया गया अपग्रेडेशन था. अभी तक मैं याहू मेल का लेटेस्ट बीटा वर्सन प्रयोग कर रहा था लेकिन अब याहू ने इसकी टेस्टिंग पूरी कर ली है और इसे पूर्ण परीक्षण उपरांत नए सिरे से लांच कर दिया है. अब याहू मेल का एडवांस वर्सन बीटा नहीं रह गया. जो लोग याहू मेल क्लासिक प्रयोग कर रहे थे शायद उन्हे इस समस्या से न जूझना पड़ा हो.

Friday, August 15, 2008

समस्याग्रस्त हुआ याहू मेल

याहू की मेल सेवा 14 अगस्त से किसी बड़े error से जूझ रही है. वजह तो नहीं मालूम लेकिन याहू मेल इन दिनों सामान्य स्थितियों में नहीं खुल रहा. पहले तो मैने सोचा कि शायद मेरे मेल बाक्स में ही कुछ उल्टा सीधा हो गया होगा लेकिन जब अपने कुछ मित्रों से पूछा तो वे भी इसी समस्या से जूझ रहे थे. यह बात तो सतना जिले की है. बाकी का मुझे पता नहीं. यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा है तो बताएं. कुछ का तो यह भी कहना है कि जी-मेल से मिल रही चुनौतियों से बचने के लिये शायद याहू वालों ने कुछ अपग्रेडेशन शुरू किया है. यह समस्या शायद इसी वजह से आ रही हो.

Monday, July 21, 2008

इस(डील की) लड़ाई में सहभागी बने

मामला दरअसल सरकार ही नहीं विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का है. परमाणु डील से शुरू हुई लड़ाई अब राजनीतिक स्वार्थ का रूप ले चुकी है. जो जहां अवसर पा रहा है वहीं बिक रहा है. जिसे अवसर मिल रहा है वह खरीद रहा है. खरीदने और बिकने वाले कोई और नहीं लोकतंत्र के वे नुमाइंदे हैं जो हमारी ही गलती से वहां तक पहुंचे हैं जहां पहुंचने का मेरी नजर में कोई हकदार नहीं है. न तो इन्हे लोकतंत्र की मर्यादा का ज्ञान है न ही उन्हें उस मुद्दे की ही जानकारी है जिस पर लड़ाई हो रही है.
परमाणु करार से यह नुकसान है ... इस करार से यह फायदा है... दिनभर इसका राग तो वे अलाप रहे हैं लेकिन उन्हें यही जानकारी नहीं है कि परमाणु करार है क्या?
इनसे हालांकि उम्मीद ही नहीं करनी चाहिए लेकिन इनकी हरकते देख कर तो मैं शर्मशार हो ही रहा हूं कि इनके दम पर हम भविष्य में भारत को महाशक्ति का दर्जा दिलाने का स्वप्न देख रहे हैं. इनसे बेहतर तो सड़ी लाशों में बिलबिलाने वाले वे कीड़े हैं जिन्हे यह जानकारी होती है कि कौन सी लाश सड़ी है और कौन नहीं. लेकिन हमारे ने नेता तो यह भी नहीं जानते कि कौन से और किस मामले में उन्हें बिलबिलाना है. हत्यारे और अपराधी देश की दिशा तय कर रहे हैं. अनपढ़ों की फौज हाइड एक्ट पर रटारटाया बयान दे रही हैं...
इन्हें टीवी स्क्रीन पर देख कर व अखबारों में पढ़कर तो इनके बारे में घिन आ रही है. एक चैनल का वह प्रश्न जिसमें सांसदों से यह पूछा गया कि एटमी डील क्या है? उनके जवाब सुनकर शायद बुद्धिजीवी तो कुछ कहने की स्थिति में ही नहीं है.


इसलिये सभी से निवेदन है इस मुद्दे पर कुछ न कुछ तो टिप्पणी लिखें. जरूर यह आवाज ज्यादा दूर तक नहीं जाएगी लेकिन जहां भी जाएगी अपनी धमक तो सुना कर ही रहेगी.

Saturday, July 19, 2008

कातिल तय करेंगे देश की किस्मत

आजादी के दीवानों ने अपने सर कलम कराते वक्त यह न सोचा रहा होगा कि आजाद भारत की किस्मत का फैसला कातिलों के हाथ होगा न ही संविधान निर्माताओं ने यह सोचा होगा कि खून से सने हाथ संविधान के पन्नों के सहारे ही लोकतंत्र की दिशा तय करेंगे.
लेकिन यह होने जा रहा है. सारा देश देख रहा है लेकिन लोकतंत्र के इन फरमाबरदारों को इससे क्या लेना. उन्हें तो अपनी लाज बचानी है चाहे देश का सत्यानाश हो जाए. जिन्हे यह नहीं मालूम के राष्ट्र गीत क्या है वे राष्ट्र की परिभाषा नहीं जानते वहीं आज राष्ट्र की सबसे प्रभुत्वशाली भवन में जाकर अपनी मनमानी कर रहे है.
हत्या, बलात्कार, लूट जैसे जघन्य अपराधों के जुर्म में सींखचों के पीछे कैद अपराध जगत के बाहुबली अपराधी अब सरकार की जिंदगी का फैसला करेंगे. देशभक्ति का दम भरने वाले दल सारी मर्यादाएं भूल कर सरकार बचाने व गिराने के लिये इनके पैरों में गिर रहें.
अब क्या आशा कर सकते हैं कि देश की दशा व दिशा क्या होगी.

Sunday, April 13, 2008

तो क्या वह लाश लापता पत्रकार की है ?

विगत दिवस मैहर में मिली युवक की लाश का मामला गहरा गया है. युवक की हत्या के बाद फरार युवती की भी हत्या कर दी गई है. उसका शव बनारस के एक होटल में बरामद किया गया है. संभावना जताई जा रही है मैहर में मिला शव इलाहाबाद से लापता एक पत्रकार का हो सकता है. इधर लाश के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस और मध्य प्रदेश पुलिस में हड़कंप मच गया है. इससे मामले के हाईप्रोफाइल होने के भी कयास लगाए जा रहे हैं. सतना के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजाराम सिंह ने बताया है कि मैहर के कादम्बनी होटल में के गेस्ट हाउस में युवक की हत्या के बाद वहां से जो दस्तावेज मिले थे वहीं दस्तावेज बनारस के सिगरा इलाके में स्थित होटल आदित्यइन में हैं. मैहर से युवक की हत्या के बाद फरार हुई युवती का शव उसी होटल के एक कमरे में पाया गया है. मैहर में मृत युवक ने अपना नाम मनोज सिंह तथा युवती का नाम अंजली सिंह बताया था तथा पता दुर्गा अपार्टमेंट सरदार पटेल रोड इलाहाबाद उत्तरप्रदेश दर्ज कराया था. लेकिन पुलिस की पड़ताल में युवती का शव मिलने के बाद उसका असली नाम ज्योत्सना डेविड पता चला है. उसने नीरज सिंह नामक युवक से शादी करके अपना नाम ज्योत्सना सिंह लिखना शुरू कर दिया था. वह इलाहाबाद में एक नर्सिंग होम में नर्स थी. युवती अपने साथी युवक के साथ 6 अप्रैल को दोपहर मैहर होटल में पहुंची थी. बुधवार को तड़के वह युवती होटल से फरार हो गई थी तथा बाद में होटल के वेटर को फोन करके बताया कि मेरे कमरे में युवक की लाश पड़ी है. वह मेरा पति नहीं था. वह सिर्फ इन्ज्वाय करने आई थी. उसने यह भी बताया था वह काफी दूर निकल आई है और अपना सिम कार्ड तोड़ रही है. इसके बाद पुलिस की छानबीन में पता चला कि इलाहाबाद में एक दैनिक हिन्दी अखबार का उप संपादक स्तर का कर्मचारी लापता है. इस घटना की सूचना मिलने पर इलाहाबाद से पुलिस व उसके परिजन यहां शव की शिनाख्त के लिये पहुंचे हैं. शिनाख्त में विरोधाभासमैहर शिनाख्त में पहुंची पुलिस व युवक के परिजनों ने जहां शव की अखबार के कर्मचारी होने से इन्कार किया है वहीं होटल के एक कर्मचारी ने उनके साथ लाई फोटो को देख कर पूरी तरह से यह संभावना जताई है कि फोटो मैहर में मृत युवक की ही है. इस बात को लेकर स्थानीय पुलिस उहापोह में है.

क्या माफिया या हाईप्रोफाइल लोगों से जुड़े हैं तार
इस घटना ने यूपी व एमपी पुलिस को झकझोर कर रख दिया है. इसके पीछे असलियत क्या है यह जानने की कोशिश लगातार की जा रही है. कयासों की बात करें तो इस घटना के पीछे ऐसा जान पड़ता है कि युवक के पास कोई बड़ा मामला रहा होगा. वह सनसनी खेज घटना को अंजाम देने वाला रहा होगा. इस लिये माफिया या हाईप्रोफाइल लोगों ने युवक की हत्या के लिये युवती का इस्तेमाल किया होगा.बाद में सबूत मिटाने के लिये युवती की भी हत्या कर दी.

मामा ने भी किया बलात्कार
बनारस में युवती के कमरे से एक पत्र मिला है जिसमें लिखा है कि मैं परेशान हूं . मेरा पति ठीक नहीं है. उसने पूरे इलाहाबाद में मेरा दैहिक शोषण कराया. मामा ने भी मेरा बलात्कार किया. मेरा पति नीरज सोनभद्र टाडा का है. वह इण्डालको में नौकरी करता था. तभी से मेरे और उसके बीच संबंध बन गए थे. पन्द्रह दिन से पति भी लापता है.

इस हत्याकांड ने कई सवाल खड़े कर दिये है-
यदि शव पत्रकार का है तो पुलिस व परिजन पहचानने से इंकार क्यों कर रहे है.
पुलिस ने आज जो फोटो जारी किये है उसमें उसके माथे में गोली के भी निशान दिख रहे हैं.
आखिर युवती बनारस क्यों पहुंची.
युवती ने आत्महत्या की या उसकी हत्या की गई.
इस तरह के तमाम सवाल अभी गुत्थी बने हुए है वहीं एक और सामाजिक नजरिया भी सामने आया है कि क्या पति अपनी पत्नी को बाजार में उतार सकता है यदि हां तो उस युवती ने तब पुलिस को क्यों नहीं बताया.

Thursday, April 10, 2008

वो कौन थी?

सतना जिले के मैहर स्थित होटल कादम्बिनी में बुधवार की दोपहर एक युवक का संदिग्ध शव पाया गया. नवरात्रि चलने से यहां देश भर से लोग आ रहे है जिससे इस घटना ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार उस युवक की उम्र 30 के आसपास थी. पूरा शरीर नीला पड़ चुका था. नाक मुंह से खून निकल रहा था. पुलिस को सूचना होटल वालों ने दी. बताया गया है कि मृतक 6 अप्रैल को दोपहर 2.30 बजे एक महिला के साथ होटल आया था. यहां महिला को अपनी पत्नी बताते हुए कमरा बुक कराया था. होटल का कमरा खाली न होने पर रेस्ट हाउस के तौर पर बना के कमरा नं बी1 दिया गया था. उसने 3 हजार रुपये एडवांस भी दिये. उन्होंने बताया कि वे यहां दस दिन भी रुक सकते हैं. 7 अप्रेल को वे घूमने गए. युवक ने शारदा मंदिर में सिर भी मुंडवाया. वापस आकर खाने पीने की वस्तुएं मंगा कर बुधवार तड़के देवी दर्शन की बात कही.
उधर बुधवार को तड़के 4 बजे महिला होटल से निकल कर कहीं चली गई. दोपहर लगभग ढाई बजे उसने ही अपने मोबाइल से होटल के रिशेप्शन में फोन कर कमरे में शव पड़े होने की सूचना दी. उसने बताया कि वह युवक उसका पति नहीं है. वह यहां एन्ज्वाय करने आई थी. अब वह काफी दूर आ चुकी है. तथा उसका पता लगा पाना मुश्किल है. इस लिये उसे तलाश करने की कोशिश न करें और बात करने के बाद वह सिम भी तोड़ देगी. पुलिस को सूचना करके कमरे से लाश निकलवा लो.
इस जानकारी से घबराए होटल वालों ने इसकी सूचना पुलिस को दी. आनन फानन में पुलिस सक्रिय हुई और दलबल समेत वहां पहुंच गई. एफएसएल अधिकारी जांच में लगे हैं. कमरे में सूटकेस, डायरी, स्टेथेस्कोप, सूटकेस पर हवाई यात्रा का स्टिकर चिपका हुआ है. डायरी में मृतक ने अपनी आत्मकथा लिखते हुए अपने ईसाई होने की बात कही है तथा ताबूत की व्यवस्था कर लावारिस की तरह लाश दफन करने की भी बात कही है. उसमें जीवन की पुरानी बातो का जिक्र भी किया है. उसने बताया है कि उसकी पत्नी बदचलन है. जिससे वह लगातार परेशान रहा. इसी से वह यहां माता के दर्शन करने आया था. उसे रास्ते में कालगर्ल मिल गई उसके साथ वह यहां आ गया.
लेकिन कुछ सवाल जो पुलिस के लिये परेशानी बन गए हैं
वह महिला कौन थी जो युवक के साथ आई थी.
क्या महिला ने ही मर्डर किया.
यदि महिला ने मर्डर किया तो डायरी में किसने लिखा.
मोबाइल का सिम कहां का था.
इस मामले का एक सनसनी खेज पहलू यह भी है कि लाश मिलने के बाद चेक आउट फार्म पर एण्ट्री दर्ज की गई है.
६ तारीख को रजिस्टर में मात्र २ कमरों की बुकिंग दर्ज है इस आधार पर सात कमरे खाली थे तो फिर युवक को गेस्ट हाउस में क्यो ठहराया.