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Sunday, August 21, 2011

जाने क्या है लोकपाल बिल


क्या है लोकपाल बिल
1. इस कानून के अंतर्गत, केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन होगा।

2. यह संस्था निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट की तरह सरकार से स्वतंत्र होगी। कोई भी नेता या सरकारी अधिकारी जांच की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर पाएगा।

3. भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कई सालों तक मुकदमे लम्बित नहीं रहेंगे। किसी भी मुकदमे की जांच एक साल के भीतर पूरी होगी। ट्रायल अगले एक साल में पूरा होगा और भ्रष्ट नेता, अधिकारी या न्यायाधीश को दो साल के भीतर जेल भेजा जाएगा।

4. अपराध सिद्ध होने पर भ्रष्टाचारियों द्वारा सरकार को हुए घाटे को वसूल किया जाएगा।

5. यह आम नागरिक की कैसे मदद करेगा
यदि किसी नागरिक का काम तय समय सीमा में नहीं होता, तो लोकपाल जिम्मेदार अधिकारी पर जुर्माना लगाएगा और वह जुर्माना शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में मिलेगा।

6. अगर आपका राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट आदि तय समय सीमा के भीतर नहीं बनता है या पुलिस आपकी शिकायत दर्ज नहीं करती तो आप इसकी शिकायत लोकपाल से कर सकते हैं और उसे यह काम एक महीने के भीतर कराना होगा। आप किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की शिकायत लोकपाल से कर सकते हैं जैसे सरकारी राशन की कालाबाजारी, सड़क बनाने में गुणवत्ता की अनदेखी, पंचायत निधि का दुरुपयोग। लोकपाल को इसकी जांच एक साल के भीतर पूरी करनी होगी। सुनवाई अगले एक साल में पूरी होगी और दोषी को दो साल के भीतर जेल भेजा जाएगा।

7. क्या सरकार भ्रष्ट और कमजोर लोगों को लोकपाल का सदस्य नहीं बनाना चाहेगी?
ये मुमकिन नहीं है क्योंकि लोकपाल के सदस्यों का चयन न्यायाधीशों, नागरिकों और संवैधानिक संस्थानों द्वारा किया जाएगा न कि नेताओं द्वारा। इनकी नियुक्ति पारदर्शी तरीके से और जनता की भागीदारी से होगी।

8. अगर लोकपाल में काम करने वाले अधिकारी भ्रष्ट पाए गए तो?
लोकपाल/लोकायुक्तों का कामकाज पूरी तरह पारदर्शी होगा। लोकपाल के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर उसकी जांच अधिकतम दो महीने में पूरी कर उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा।

9. मौजूदा भ्रष्टाचार निरोधक संस्थानों का क्या होगा?
सीवीसी, विजिलेंस विभाग, सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (अंटी कारप्शन डिपार्टमेंट) का लोकपाल में विलय कर दिया जाएगा। लोकपाल को किसी न्यायाधीश, नेता या अधिकारी के खिलाफ जांच करने व मुकदमा चलाने के लिए पूर्ण शक्ति और व्यवस्था भी होगी।

Thursday, August 4, 2011

नेताओं की साजिश में फंसा लिलजी बांध, प्रदेश में अपनी तरह के नये नियम का प्रस्ताव

लिलजी बांध जो कभी रीवा राज्य में जल संग्रहण व संरक्षण के लिये तैयार किया गया था लेकिन बाद में यह पता चलने पर कि यहां चूना पत्थर काफी मात्रा में है इसके लिये साजिश का दौर शुरु हो गया। तत्कालीन समय में कांग्रेस विधायक राजेन्द्र सिंह ने इसके लिये कोशिश की और इसे जल संसाधन से राजस्व भूमि में बदलने की प्रक्रिया प्रारंभ कराई। सरकार बदलने पर मंत्री राजेन्द्र शुक्ला व सांसद गणेश सिंह इसमें शामिल हो गये और इस बांध के लिये एक नायब तहसीलदार के अनुमोदन पर लीज स्वीकृत करा दी। जबकि नियमानुसार एसडीएम या तहसीलदार की अनुमति जरूरी होती है। लेकिन लिलजी पर एक सीमेंट फैक्ट्री की नजर होने के बाद इसमें अमरपाटन के विधायक रामखेलावन ने भी अपनी आपत्ति जता कर इस खेल में कूद गये और लाभार्थी ग्रुप में शामिल कर लिये गये। और अब यही लाभार्थी ग्रुप अपने समर्थक कब्जेदारों को यही जमीन दिलाने प्रदेश में अपने तरह का नया नियम बनाने के लिये प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भिजवा दिया। इसके पीछे मंशा है कि बाद में इनसे फैक्ट्री के लिये जमीन ले ली जायेगी। यहां किसी एसबी सीमेंट फैक्ट्री की नजर लगी होने की बात कही जा रही है। 
लेकिन इस प्रस्ताव को स्वीकार करना सरकार के गले की हड्डी बन जायेगा क्योंकि तब पूरे प्रदेश से ऐसे मामले जमीन लेने के सामने आने लगेंगे तो मेधा पाटकर भी अपनी मांग पर दोबारा जुट सकती हैं। 
जल संसाधन को वापस देना उचित
इस मामले का सबसे बढ़िय़ा विकल्प इसे वापस जलसंसाधन विभाग को देकर इस बांध के गेट बंद कराकर जल संग्रहण की बड़ी संरचना का रूप दे दिया जाये। यह सरकार की जल संग्रहण की नीति का भी पक्षधर होगा। 

Wednesday, March 30, 2011

रामवन के विकास में गुम हो गये हनुमान जी

जिले का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल रामवन अब पर्यटन स्थल बनने जा रहा है। यहां अब धार्मिकता कम दिखावा व सौर्दर्यीकरण ज्यादा हो चला है। सेवक के रूप में पहचाने जाने वाले राम भक्त हनुमान की विशाल प्रतिमा की वजह से कभी पहचाने जाने वाले हनुमान जी की आज रामवन विकास के बाद हालात यह हो गये हैं कि वे एक कोने में अकेले खड़े नजर आते हैं। यू तो यहां के स्वयं भू विकास पुरुष श्री कृष्ण माहेश्वरी जो चित्रकूट के नानाजी की तरह अपनी पहचान बनाने के लिये तमाम विकास गाथाएं कह रहे हैं लेकिन उनमें नानाजी के एक भी अंश नहीं हैं। दो पंचायतों की राशि का हक मारकर इनके पैसे से विकास कराकर अपनी वाहवाही बताने वाले कहीं भी पंचायत को इसका श्रेय नहीं देते। जबकि हकीकत यह है कि यह सब कुछ पंचायतों की दयानतदारी या कहें कि पंचायत जनप्रतिनिधियों की नासमझी है कि पंचायत के हिस्से की राशि को रामवन में खर्च किया गया। दूसरी ओर यहां मुख्यमंत्री आने वाले हैं इसके लिये बनी सड़कों पर मुरुम का छिड़काव कर इसे नई सड़क दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि रामवन विकास के लिये जो राशि दी गई है वह जनभागीदारी की है इसमें जनभागीदारी का हिस्सा अभी तक जमा नहीं हुआ और मूल निधि पूरी खर्च हो गई। दूसरी ओर मतहा रिछहरी के मूल ग्रामीण रामवन विकास को महज ढकोसला करार देते हुए कहते हैं कि यहां कुछ लोगों की ऐशगाह बन रही है जिसका यहां की जनता को कोई लाभ नहीं है। कुछ लोगों ने इसे अपने कब्जे में लेने का सफल प्रयास किया जो कामयाब होता दिख रहा है। यहां के अतिथि गृह जो आरामगाह साबित होगी उसकी छत से हनुमान जी का नजारा ले तो अपने आप स्पष्ट हो जायेगा कि हनुमान इस भीड़ में कहीं खो गये हैं।

हनुमान के दूसरी ओर सौदर्य का नजारा

















मानस संघ ट्रस्ट के काम में जुटा प्रशासनिक अमला
















बनी सड़क के उपर मुरुम का छिड़काव कर दिखाई जा रही नई सड़क















इस तरह से रामवन में खर्च हो गये करोड़ो लेकिन कोई कुछ न कहेगा क्योंकि इस विकास गाथा में शामिल है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के श्री कृष्ण माहेश्वरी। लेकिन माननीय माहेश्वरी जी भूल गये कि वे नानाजी की तरह त्याग व समर्पण कहां से लायेंगे।