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Friday, February 24, 2012

चित्रकूट, रैगांव अमरपाटन में भाजपा बदलेगी अपनी सीट

जुगुलकिशोर बागरी
लगातार दूसरी पारी खेल रही मध्य प्रदेश भाजपा को 2013 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भारी मशक्कत करना पड़ सकता है। 230 विधानसभा सीटों वाले मध्य प्रदेश में 155 सीटों पर भाजपा की हालत पतली ही दिख रही है। इसका कारण शिवराज सिंह चौहान का मूल रूप से नौकरशाहों पर निर्भर होना ही बताया जा रहा है। शिव के इशारों को नौकरशाह बखूबी समझ रहे हैं किन्तु सांसद विधायकों और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा शिवराज पर भारी पड़ने वाली है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी सूत्रों का कहना है कि शिव का राज पांच
सुरेन्द्र सिंह चित्रकूट
लोग मिलकर चला रहे हैं। ‘‘मुख्यमंत्री जी की मंशा है‘‘ के जुमले को पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी के शासनकाल की तरह ही इस्तेमाल किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि सीएम द्वारा दिए गए निर्देशों को सिर्फ मुख्य सचिव को दिया जाता है। फिर सीएस द्वारा संभागायुक्तों को बुलाकर उन्हें मुख्यमंत्री की इच्छा से आवगत करा दिया जाता है। तीसरी कड़ी में संभागायुक्तों द्वारा जिला कलेक्टर्स को बुलाकर निर्देश दे दिए जाते हैं। अगर कोई कलेक्टर इस बारे में सवाल करता है कि अगर विधायक या सांसद ने कुछ हटकर चाहा तो? इस पर उन्हें कह दिया जाता है कि सीएम साहब की यही इच्छा है बस, बाकी सबको हाशिए पर डाल दिया जाए। संभवतः यही कारण है कि काडर बेस्ड भारतीय

रामखेलामन पटेल
जनता पार्टी का जनाधार दिनों दिन गिर रहा है। इसके साथ ही साथ प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों द्वारा रोजाना करोड़ों रूपए उगले जा रहे हैं। कार्यकर्ता इससे आज़िज आ चुके हैं। कहा जा रहा है कि सांसद और विधायक निधि में भी बंदरबांट जारी है। आलम यह है कि प्रदेश में अनेक सांसद विधायकों द्वारा समाचार पत्रों में विज्ञापन छपवाकर विज्ञापन के देयकों के भुगतान भी पत्रकारों से दो तीन नाम मांगकर उनके नाम पर किए जाने की शिकायतें अब आम हो गई हैं।
इन इलाकों में भाजपा की हालत खराब
दिमनी, अम्बाह, अटेर, मेहगांव, ग्वालियर पूर्व, सेवढ़ा, शिवपुरी, कोलारस, बामोरी, चंदेरी, जतारा, चंदला (अजा), बिजावर, पथरिया, दमोह, पवई, गुन्नौर (अजा), चित्रकूट, रैगांव (अजा), अमरपाटन, देवतालाब, मनगवां (अजा), सिहावल, कोतमा, पुष्पराजगढ़ (अजजा), निवास (अजजा), बैहर (अजजा), लखनादौर (अजजा), अमरवाड़ा (अजजा), सौंसर, परासिया (अजा), बैतूल, घोड़ाडोंगरी (अजजा), नरेला, भोपाल मध्य, नरसिंहगढ़, हाट पिपलिया, खातेगांव, पंधना (अजजा), नेपानगर (अजजा), अलीराजपुर (अजजा), मनावर, धार, इंदौर-5, राऊ, मंदसौर, मल्हारगढ़, जावद, बीना (अजा), सेमरिया, बडऩगर।

शिवराज हैटट्रिक करेंगे या नहीं

इस सवाल का जवाब ढूंढने में लगी खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट कहती है कि प्रदेश की 155 से ज्यादा सीटों पर भाजपा की हालत बहुत खराब है। जिन मुद्दों पर भाजपा 2003 में जीती थी, उन्हीं मुद्दों पर अंडरकरंट दिख रहा है। लोकसभा चुनावों के अप्रत्याशित परिणामों का असर भी इन सीटों पर दिखाई दे रहा है। अन्य राज्यों से लगी विधानसभा सीटों पर भी भाजपाविरोधी लहर साफ दिख रही है।
मध्यप्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव है। लेकिन 2003 में दिग्विजय सिंह को गद्दी से उतारकर भाजपा ने जिन मुद्दों पर सरकार बनाई थी, वह मुद्दे आज उसके खिलाफ जा रहे हैं। इसके बाद भी भाजपा फीलगुड में है। दूसरी ओर कांग्रेस में गुटबाजी हावी है। बावजूद इसके अंडरकरंट कांग्रेस के पक्ष में है। भोपाल से प्रकाशित पाक्षिक ‘बिच्छू डॉट कॉम‘ ने खुफिया एजेंसी के सर्वे का हवाला देकर कहा है कि कि 230 सीटों वाली मध्यप्रदेश विधानसभा की 155 सीटों पर भाजपा की हालत बेहद खराब है।
सरकार विरोधी अंडरकरंट बहुत तेज है। इसकी झलक प्रदेश 2009 के लोकसभा चुनावों में देख चुका है। सालों से संसद जा रहे भाजपा के धुरंधरों को उनकी परंपरागत सीटों पर ही ध्वस्त होते देखा था। 2013 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सरकार ने एक खुफिया एजेंसी से सर्वे कराया है। इसमें सिर्फ वास्तविक राजनीतिक स्थिति का आकलन करने का काम सौंपा गया था। कई जिलों में 2003 में भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ किया था। इनमें अधिकांश विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) वर्ग से थी। अब हालात बदल गए हैं। इन जिलों में कांतिलाल भूरिया के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने (केबी फेक्टर) और विधानसभा में विपक्ष की नेता रहीं जमुनादेवी के सुहानुभूति वोटों का असर दिखाई देगा। उत्तरप्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र की सीमा से लगी सीटों पर दूसरे राज्यों की राजनीति का सीधा असर है।

फीलगुड कहीं शाइन कम न कर दें
2004 के लोकसभा चुनावों में फीलगुड और इंडिया शाइनिंग ने भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। इसके बाद भी मध्यप्रदेश सरकार इसी फार्मूले पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। भाजपा के खिलाफ ग्वालियर-चंबल, विंध्य और बुंदेलखंड में जबरदस्त अंडरकरंट हैं। मालवा के कई आदिवासी क्षेत्रों में जहां भाजपा अपना जनाधार बढ़ाने के लिए तेजी से सक्रिय है वहां बेरोजगारी के चलते तेजी से पलायन हो रहा है। विंध्य में कुपोषण और भुखमरी के कारण लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश है तो बुंदेलखंड में बेरोजगारी उसकी मुश्किल बढ़ा सकती है। चुनाव से पहले सड़कों को ठीक करने की सरकार की मंशा भी उसके लिए उल्टा-दांव पड़ सकती है। सड़कों की दुर्दशा से भाजपा के शहरी मतदाता भी उससे नाराज हैं। इन मतदाताओं की माने तो वे भी जानते हैं कि चुनाव से पहले सरकार इन सड़कों को ठीक कर एक बार फिर वोटर को ठगने का जतन करेगी। चुनाव के समय किसानों को भरपूर बिजली देने के लिए बिजली की खरीदी भी होगी, इसके बाद फिर पांच साल तक किसान खाद, बीज, पानी और सड़क के लिए तरसेगा। भाजपा के मंत्रियों का बड़बोलापन और प्रदेश में भ्रष्टाचार भी उसके लिए मुसीबत बन सकता है।

कांग्रेस को दूर करनी होगी गुटबाजी
कांग्रेस की हर बैठक में गुटबाजी के कारण झगड़े होते हैं। बड़े नेता कार्यक्रमों और बैठकों से किनारा कर रहे हैं। इससे कांग्रेस में कलह साफ दिख रही है। भोपाल में पिछले दिनों प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद की मौजूदगी में हुई महत्वपूर्ण बैठक में वरिष्ठ कांग्रेस नेता नदारद थे। सभी सांसदों और विधायकों ने भी इसमें उपास्थिति दर्ज नहीं कराई। जेल भरो आंदोलन से भी बड़े और दिग्गज नेताओं ने दूरियां बना रखी है। बेटे को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर करने के कारण पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष यादव नाराज चल रहे हैं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय जमुना देवी की गैरमौजूदगी में कांग्रेस के लिए आदिवासी वोट बैंक बरकरार रखने के लिए कड़ी मशक्कत करना पड़ेगी। भूरिया क्षेत्र से निकलकर पहली बार प्रदेश के आदिवासी नेता बनने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी हाईकमान भी उन्हें आदिवासी नेता के रूप में प्रदेश में स्थापित कराना चाहता है, इसमें कितनी सफलता मिलती है यह अगले चुनाव में ही स्पष्ट होगा।


केबी फेक्टर दिखाएगा असर
झाबुआ, धार, बडवानी, खरगोन, खंडवा जैसे महाराष्ट्र-गुजरात से लगे जिलों में उमा भारती की लहर 2003 में दिखाई दी थी, वैसा असर 2008 के चुनावों में नहीं दिखी। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कांतिलाल भूरिया के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने का फायदा भी उनकी पार्टी को मिल सकता है। केबी फेक्टर का असर उन जिलों में देखने को मिल सकता है, जहां उनका अश्छा-खासा प्रभाव है। जमुनादेवी को लेकर सुहानुभूति भी इन सीटों पर दिखाई पड़ सकती है। आदिवासी सीटों पर वैसे ही भाजपा को जैसा समर्थन 2003 में मिला था, वैसा अब नहीं दिखाई दे रहा।

ग्वालियर-चंबल संभाग में सब दमदार
ग्वालियर-चंबल संभाग में भी उत्तरप्रदेश का फेक्टर काम करेगा। बसपा वहां जीती तो इन इलाकों के जिलों में भी अपना असर दिखा सकती है। इस क्षेत्र में फूलसिंह बरैया की पार्टी भी अच्छा-खासा जनाधार रखती है। बसपा से निकाले जाने पर भाजपा ने उन्हें अपनाया लेकिन उन्हें वहां पर्याप्त तवज्जो नहीं मिली। इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ दी। रीवा से मुरैना तक 31 सीटें ऐसी हैं, जहां बसपा ने दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।

दिग्गी गुट का कब्जा
प्रदेश कांग्रेस कमेटी पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गुट का कब्जा है। कांतिलाल भूरिया और दिग्विजय सिंह समर्थकों के कब्जे के कारण दूसरे गुट के नेता और पदाधिकारी वहां सिर्फ बैठकों में ही बुलाने पर हाजिर होते हैं वे भी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए।


कांग्रेस में कलह
कांग्रेस ने विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव और जेल भरो आंदोलन के जरिए अपने इरादे जाहिर स्पष्ट कर दिए हैं। लेकिन कांग्रेस की कथित एकता खंडित हो रही है। बड़े नेताओं की अरुचि की वजह से कार्यकर्ताओं में जोश नहीं है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ओर प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया की जोड़ी प्रदेश सरकार की नींद उड़ाए हुए है। इस जोड़ी ने पिछले दो महीने में जो सक्रियता दिखाई और सरकार पर जोरदार हमले किए उससे कांग्रेस में नई जान आ गई है।

विंध्य क्षेत्र में बसपा का दबदबा
उत्तरप्रदेश चुनावों का सीधा असर विंध्य क्षेत्र के जिलों रीवा, सतना, सिंगरौली, त्योंथर में दिखाई देगा। यदि बसपा ने उत्तरप्रदेश में अच्छा प्रदर्शन किया तो वह यहां भी पैर पसार सकती है। इस इलाके में अर्जुन सिंह को हराने वाले समानता दल के प्रदेश प्रमुख का भी दबदबा है। महाराष्ट्र की सीमा से लगे छिंदवाड़ा व आसपास के जिलों में एनसीपी का प्रभाव है। यहां यह पार्टियां भले ही सीटें जीत न पाए, लेकिन बड़ी संख्या में वोट काटने में कामयाब जरूर रहेंगी।

इनकी नहीं हो रही पूछ परख
सुभाष यादव, श्रीनिवास तिवारी, इंद्रजीत पटेल, मुकेश नायक, गुफरान ए आजम, अजीज कुरैशी, सुरेश पचौरी, शोभा ओझा, बालकवि बैरागी, किसन पंत

इन मुद्दों पर है अंडरकरंट
खाद संकट, बिजली, पाला , कुपोषण, सड़क, पानी, घोषणाएं ज्यादा, काम कम

Monday, February 13, 2012

बरगी नहर में सुरंग खोदने वाली मशीन


टनल बोरिंग मशीन जो सुरंग खोदने का काम कर रही है इन दिनों पहाड़ में फंस गए है जिससे बरगी नहर का काम रुक गया है




Friday, October 21, 2011

समय से पहले लड़कियां हो रही हैं जवान, बच्चे उत्तेजित !

यह आक्सीटोसिन का असर है। 11 वीं की पढ़ाई कर रहे शुभम (बदला हुआ नाम) में लड़कियों के गुण आ गए हैं। वो बात-बात पर शर्माता रहता है। लड़कियों टाईप हरकतें करता रहता है। घर वाले तो परेशान हैं ही साथ ही दोस्त और आसपास के लोग भी उसे इन आदतों को लेकर उसे खूब छेड़ते हैं। यह अभिभावकों के लिए सतर्क होने का समय है। किशोर में स्त्री गुणोन्मुखी आदतें परेशानी का सबब बन रही हैं।

क्या है मामला ?
दरअसल, दूध व सब्जियों में ऑक्सीटोसीन की मात्रा बढ़ रही है। यही बढ़ी मात्रा उनमें यौन विसंगतियां पैदा कर रही हैं। लड़कियों का हाल तो और बुरा है। उनकी यौवनावस्था घट रही है। नौ से 11 साल की उम्र में वो 18 की हो जा रही हैं। इसी का कारण है कि स्कूलों में सेक्स क्राइम की घटना बढ़ रही है। कम उम्र के बच्चे भी उत्तेजित हो रहे हैं। कम उम्र के बच्चों में डायबिटिज़ होने का डर भी रहता है।

क्या कहते हैं पर्यावरणविद् ?
चर्चित पर्यावरणविद् डॉ. नितीश प्रियदर्शी ने भास्कर डॉट कॉम को बताया कि इन कारणों के पीछे ऑक्सीटोसीन युक्त दूध बड़ा कारण है। इसका इंजेक्शन स्वास्थ्य और पर्यावरण को चुनौती दे रहा है। ग्वाले इस इंजेक्शन का उपयोग मवेशियों को देते हैं। फलतः में दुग्ध ग्रंथियां उत्तेजित होती हैं और नियमित इंजेक्शन से दूध में ऑक्सीटोसीन की मात्रा बढ़ जाती है। वहीँ, किसान भी अधिक लाभ कमाने के लिए पौधों में इसका उपयोग करते हैं। इससे सब्जियां भी शरीर में नए चीजों को लाने में मददगार साबित हो रही हैं।

क्या कहते हैं डॉक्टर ?
डॉ. कारण अपूर्व कि मानें तो ऑक्सीटोसीन एक सेक्स हारमोन है। यह दुग्ध ग्रंथियों, यौन ग्रंथियों तथा गर्भाशय पर असर करता है। ऑक्सीटोसीन युक्त दूध पीकर कम उम्र के लड़के-लड़कियां प्रभावित हो रहे हैं। इससे यौन विकास समय से पहले होने लगता है। इतना ही नहीं लड़कों में स्त्रीय गुण भी आने लगते हैं। इसके अधिक सेवन से हारमोन अनियंत्रित हो जाता है।

क्या है ऑक्सीटोसीन ?
ऑक्सीटोसीन एक प्रोटीनयुक्त हारमोन होता है। गाय व भैंसों में दुग्ध ग्रंथियों को उत्तेजित करने के लिए आपात स्थिति में पशु चिकित्सक इसका इस्तेमाल करते हैं। पर आजकल पशुपालक इस इंजेक्शन का नियमित रूप से व्यवहार करने लगे हैं। इसी का गंभीर परिणाम पशुओं व ऑक्सीटोसीन युक्त दूध पीने वालों को भुगतना पड़ रहा है। इसी से हारमोन संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं।
(sabhar bhaskar)

Saturday, October 15, 2011

यूपीए सरकार देश के संघीय ढांचे को ध्वस्त करने में तुलीः आणवाणी

सर्किट हाउस में पत्रकार बार्ता के दौरान लालकृष्ण आडवाणी,
मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान,  प्रदेशाध्यक्ष  प्रभात झा
जनचेतना यात्रा के साथ यहां पहुंचे भाजपा के शिखर नेता लालकृष्ण आडवाणी ने परिवारवाद को  लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए कहा कि भाजपा में प्रधानमंत्री पद का फैसला संसदीय दल द्वारा लोकतांत्रिक तरीके  से होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पीएम की रेस में नहीं हैं। शुक्रवार को सतना के सर्किट हाउस में श्री आडवाणी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि कांग्रेस में पद परिवार व वंशवाद के आधार पर दिये जाते हैं। देश में भाजपा और कम्युनिस्ट ऐसी दो पार्टियां हैं जहां परिवारवाद के लिये कोई गुंजाइश नहीं है।
श्री आडवाणी ने यूपीए सरकार पर प्रदेश सरकारों के प्रति भेदभाव बरतने के तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि वे संघीय ढांचे को ध्वस्त करने में लगे हैं। एनडीए के छः साल के कार्यकाल में कभी ऐसा नहीं हुआ। श्री आडवाणी ने कहा कि एनडीए के शासनकाल में एक प्रदेश के विपक्षी पार्टी के मुख्यमंत्री का यह कहना कि ‘उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि केन्द्र सरकार ने उनके साथ न्याय नहीं किया। एनडीए के समय कभी कोई भेदभाव नहीं हुआ’ वाजपेयी सरकार के लिये बड़ा सर्टिफिकेट है।
भारत के संवैधानिक ढांचे की विशेषता बताते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में उन्हें इस बात का गर्व है कि यहां की सरकार प्रमाणिकता और सार्थकता के साथ गरीब कल्याण के कार्यक्रम लागू कर रही है। लेकिन जब एसी सरकार के साथ केन्द्र की सरकार भेदभाव करती है तो दुःख होता है।
यूपीए करती है भेदभाव
श्री आडवाणी ने कहा कि इस समय जब सा देश में भ्रष्टाचार का माहौल है वहां मध्यप्रदेश की सरकार ने भ्रष्टाचारियों की संपत्ति राजसात करने का कानून बनाया। वह कानून बनने के बाद भी केन्द्र में पड़ा रहेगा। उन्होंने  कहा कि यहां के तीन कानून है जिन्हें केन्द्र द्वारा पास नहीं किया जा रहा है। भेदभाव को और स्पष्ट करते हुए कहा कि मकोका को एमपी और गुजरात सरकार के लिये पास नहीं करती जबकि यह महाराष्ट्र का अक्षरशः है। यह मध्यप्रदेश सरकार के साथ स्पष्ट भेदभाव है। श्री आडवाणी ने केन्द्र पर हमला जारी रखते हुए कहा कि केन्द्र सरकार खाद कोयले की आपूर्ति पूरा नहीं होने देती है। यह हल्की चीजें नहीं है। यह संविधान के नजरिये से भी सीरियस मैटर है।
न्यायपालिका और लोकपाल की व्यवस्था अलग हो
श्री आडवाणी ने लोकपाल के दायरे में न्यायपालिका और प्रधानमंत्री को शामिल करने के मुद्दे पर कहा कि न्यायपालिका की व्यवस्था अलग होनी चाहिये और लोकपाल की व्यवस्था अलग होनी चाहिये। केन्द्र सरकार ने जो किया है उसमें प्रधानमंत्री को लोकपाल की व्यवस्था में नहीं रखा है, जबकि हमने राष्ट्रीय सुरक्षा को अपवाद में रखते हुए लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री को रखा था। टीम अन्ना से इस मसले पर अपनी चर्चा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 2 घंटे की चर्चा में अन्ना और उनकी टीम सभी विषयों पर एक मत थी। आज क्यों उनका मत दूसरा हो गया है नहीं जानता।
अटल जी सर्वश्रेष्ठ
पार्टी में अटल जी की सक्रियता नहीं होने के संबंध में उन्होंने कहा कि अटल जी सर्वश्रेष्ठ व सर्वमान्य नेता रहे हैं। उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। उन्हें राज्यसभा में लाने की बहुत कोशिश की लेकिन उनका कहना था कि इस अवस्था में वे अपने कर्तव्य से न्याय नहीं कर पाएंगे।
लोकायुक्त मामले पर गंभीर
ल¨कायुक्त क¨ पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है और कर्नाटक में कार्यवाही भी की है। सीएम को ऐसे मामलों में सख्ती बरतनी चाहिये। यह बातें उन्होंने मध्यप्रदेश में कई मंत्रियों के मामले लोकायुक्त में होने के बाद भ्रष्टाचार के दोहरे मापदण्डों पर कहीं। हालांकि इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा ने बताया कि मध्यप्रदेश में मंत्रियों के संबंध में एसी कोई लोकायुक्त रिपोर्ट नहीं हैं।

Friday, September 30, 2011

अकबर, रीवा और जोधाबाई

यह सभी जानते हैं कि महान मुगल शासक अकबर अनपढ़ था लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि अकबर का बचपन मध्यप्रदेश के रीवा जिले के मुकुन्दपुर नामक स्थान में गुजरा था। हालांकि लोग कहते हैं कि अकबर द्वितीय का बचपन यहां गुजरा था लेकिन चल रहे नये शोध से यह सामने आ रहा है कि अकबर द्वितीय नहीं मुकुन्दपुर में जलालुद्दीन अकबर का ही बचपन बीता था। यहां उसे सुरक्षा की दृष्टि से छिपा कर रखा गया था इसलिये उसकी पढ़ाई लिखाई नहीं हो पाई थी। इस दौरान तब के राजकुमार रामसिंह भी उनके साथ कभी-कभी अपना समय व्यतीत करते थे। रीवा राज्य के शासक महाराजा रामचन्द्र जी हुआ करते थे।
नीचे देखे विकीपीडिया के कुछ अंश
हुमायुं को पश्तून नेता शेरशाह सूरी के कारण फारस में अज्ञातवास बिताना पड़ रहा था। [22] किन्तु अकबर को वह अपने संग नहीं ले गया वरन रीवां(वर्तमान मध्य प्रदेश) के राज्य के एक ग्राम मुकुंदपुर में छोड़ दिया था। अकबर की वहां के राजकुमार राम सिंह प्रथम से, जो आगे चलकर रीवां का राजा बना, के संग गहरी मित्रता हो गयी थी। ये एक साथ ही पले और बढ़े और आजीवन मित्र रहे। कालांतर में अकबर सफ़ावी साम्राज्य (वर्तमान अफ़गानिस्तान का भाग) में अपने एक चाचा मिर्ज़ा अस्कारी के यहां रहने लगा
Humayun had been driven into exile in Persia by the Pashtun leader Sher Shah Suri. Akbar did not go to Persia with his parents but grew up in the village of Mukundpur in Rewa(see link:- http://emperors-shirshak.blogspot.com/2011/02/akbar-great.html)

यह लिंक भी देखे- http://indicaspecies.blogspot.com/2008/02/akbar-and-cultural-synthesis.html


अकबर का हिन्दुओं व हिन्दु धर्म के प्रति झुकाव की भी यही वजह रही कि उसका बचपन का लालन पालन मूल रूप से हिन्दुओं के बीच ही हुआ और उसे इनके बीच ही बचपना गुजारना पड़ा।
अब बात आती है अकबर को जोधाबाई कैसे पसंद आई। हालांकि इस पर शोध चल रहा है लेकिन जो बात प्रारंभिक तौर पर सामने आ रही है उसके अनुसार अकबर यहां भी जंगली क्षेत्र (तत्कालीन) मुकुन्दपुर में ही नहीं रहा बल्कि रीवा राजघराने के सदस्यों के साथ उसका आना जाना होता था। तभी कभी वह किसी आयोजन में राजस्थान राजघराने में गया होगा और तब उसे जोधाबाई मिली थी वहीं यादे बाद में अकबर के जिंदगी का फैसला बनी(हालांकि अभी यह प्रमाणिक नहीं है) लेकिन इतिहास शोधार्थी इस पर शोध कर रहे हैं।

रीवा राजघराने को कटार की पात्रता
शोध कह रहे हैं अकबर के दरबार में किसी को भी कटार ले जाने की अनुमति नहीं थी लेकिन रीवा राज घराने में गुजरे बचपन की वजह से रीवा राजघराने को अकबर के दरबार में कटार की अनुमति थी।(शोध जारी है)


इसे विस्तार करने मैटर आमंत्रित हैं- कमेंट में दें

Thursday, September 29, 2011

सिद्धपीठ मैहर देवी शारदा शक्तिपीठ | Siddha Peeth Maihar Devi (Maa Sharda Shakti Peeth)


Siddha Peeth Maihar
उतर-प्रदेश में जितना महत्व मां विध्यावसिनी का है. उतना ही मध्य प्रदेश में मां मैहर देवी का है. आधाशक्ति मां दुर्गा के विभिन्न रुपों में मां शारदा भी है. बोलचाल की भाषा में इन्हें मइहर देवी के नाम से जाना जाता है. जबकि मइहर या मैहर उस स्थान का नाम है. जहां मां शारदा का धाम है. विद्वज्जन कहते है कि यहां सती के दाहिने स्तन का पतन हुआ था. यहां की शक्ति शिवानी और भैरव  को यहां चण्ड कहा जाता है. कुछ विद्वान कहते है, इ सती के दाहिने स्तन का निपात रामगिरि में हुआ था. रामगिरि स्थान चित्रकूट में है. 
मध्यप्रदेश के सतना से 38 किलोमीटर दूर मैहर है. जो एक छोटा सा कस्बा है, किन्तु मां की ख्याती ने इसे पूरे देश में प्रसिद्ध कर दिया है. मां शारदा का धाम मैहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित है. 

पर्वतमालाओं की गोलाकार पहाडी के मध्य 587 फुट की ऊंचाई पर स्थित मां शारदा का एतिहासिक मंदिर 108 शक्तिपीठों में से एक है. यह पीठ सतयुग के प्रमुख अवतार नृ्सिंह के नाम पर नरसिंह पीठ के नाम से भी जाना जाता है. यहां की शक्तिपीठ में लगभग 1500 वर्ष पुरानी नरसिंह की प्रतिमा आज भी विराजती है. 

मां का यह मंदिर कितना पुराना है, इसका कोई सही प्रमाण उपलब्ध नहीं है. परन्तु इस मंदिर में प्रतिमा की स्थापना 502 में नुपुलदेव के करायी थी. ऎसा उल्लेख मंदिर में 10वीं शताब्दी के दो शिलालेखों में है, तो मंदिर के निर्माण की गाथा के आधार स्तंभ है. प्रवेश द्वार से मंदिर तक पहुंचने के लिये छोटी-छोटी लगभग 1000 सीढियां चढनी पडती है. जिनपर टीन के शैड लगे हे. ताकि यात्रियों को धूप-बारिश न लगें. पहाड को गोलाई में काट कर सडक भी बनाई गयी है. जो मंदिर के ठीक नीचे तक जाती है, फिर इसके बाद लगभग 200 सीढियां चढनी होती है. अशक्तों व वृ्द्धों को पहुंचाने के लिये डोली की भी व्यवस्था हे. 
किवदंती के अनुसार राजा परमाल तथा पृ्थ्वीराज चौहान के युद्ध में राजा परमाल की पराजय से क्रुद्ध होकर आल्हा ने पृ्थ्वीराज की सेना समूल नष्ट करने हेतू तलवार खींच ली थी. पर उसकी आराध्या शारदा ने उसका हाथ पकड लिया. जंगल में आल्हा तथा ऊदल अखाडा है. यहां एक ताल भी है. ताल का पानी कभी नहीं घटता है. किवंदती है कि आज भी प्रतिदिन आल्हा मां शारदा को पुष्पांजलि देने आते है.  
यह भी कहा जाता है कि आल्हा-ऊदल तथा धानू आदि भक्तों ने युद्ध में विजय की कामना से इस पहाडी पर शारदा देवी की प्रतिमा स्थापित की तथा देवी को प्रसन्न करने एक लिये आल्हा ने अपने पुत्र इन्दल की बलि  भी दी थी. तथा आज भी आल्हा -ऊदल मंदिर बन्द होने के बाद मंदिर में माता का दर्शन करने के लिये आते है. 
प्रतिवर्ष दोनों नवरात्रों में देश के कोने-कोने से भक्त यहां आते है.