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Sunday, September 27, 2009

टेस्ट मैटर है इसे न खोले

प्रदेश में शैक्षणिक व्यवस्था में तमाम कमियों की मूल वजह शिक्षकों की कमी है लेकिन यह कमी जिला स्तर से देखी जाये तो उतनी समझ में नहीं आती लेकिन शालावार इसमें व्यापक खामियां है. दरअसल जिले में छात्रअनुपात में शिक्षकों की पदस्थापना न होना सबसे बड़ी समस्या है. जहां 50 छात्र हैं वहां भी 5 शिक्षक हैं और जहां 400 छात्र हैं वहां भी 5 शिक्षक. इस समस्या को दूर करने शासन की युक्तयुक्तकरण की व्यवस्था तो है लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा या फिर प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा है. मैं रीवा संभाग में शिक्षा विभाग की रिपोर्टिंग करता हूं और मैने पाया है कि यदि युक्तियुक्त करण प्रभावी ढंग से हो जाये तो 75 फीसदी शैक्षणिक व्यवस्था ढर्रे पर आ जायेगी. लेकिन शिक्षा महकमें के अधिकारियों से बातचीत में यह भी खुलासा हुआ है कि युक्तियुक्तकरण की व्यवस्था जो अभी है वह काफी खामियो को जन्म देती है और प्रभावशाली लोग इससे बच जाते है. इसलिये युक्तियुक्तकरण राजधानी स्तर पर संचालनालय द्वारा किया जाय. इसके लिये जिलों से शालावार छात्र संख्या व शिक्षक संख्या मंगा कर राजधानी से ही युक्तियुक्तकरण किया जाये.

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