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Tuesday, June 5, 2007

मौसम और अपराध का गहरा नाता


मौसम और अपराध का काफी गहरा नाता है. जिस तरह से मौसम बदलता जाता है उसी प्रकार अपराध की संख्या और प्रकार में भी बदलाव आता है. मनोवैज्ञानिकों और विज्ञान के अनुसार अपराध और अपराध की प्रवृत्ति के लिए मौसम काफी हद तक जिम्मेदार होता है. शहर में हुए अपराधों के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि तापमान जितना बढ़ता है अपराधों की संख्या में भी उतनी ही तेजी से इजाफा होता है वहीं जब तापमान चरम पर पहुंच जाता है तो अपराधों की संख्या घटने लगती है. इस तरह अपराध और तापमान में वक्र रैखीय समानता. यही नहीं मनोवैज्ञानिकों की माने तो मौसम का अच्छा खासा असर अपराध की प्रवृत्ति पर पड़ता है. मनौविज्ञानी डॉ. कुलभूषण सक्सेना के अनुसार अपराध का जिम्मेदार अपराधी की प्रवृत्ति होती है और प्रवृत्ति काफी हद तक मौसम द्वारा भी संचालित होती है. उन्होंने बताया कि बसंत के मौसम में चारों ओर खुशहाली होती है जिसका असर मानववृत्ति पर भी पड़ता है और यदि उस समय के अपराधों पर गौर करेंगे तो उनकी संख्या अन्य मौसमों से कम होगी या फिर अपराध की प्रवृत्ति काफी कम गंभीर होगी. अपराध शास्त्र के प्रोफेसर जी.डी. मालवीय के अनुसार अपराध के लिये विशुध्द तौर पर मौसम मुख्य कारक होता है. जैसे जैसे मौसम बदलता है वैसे-वैसे अपराध की प्रवृत्ति भी बदलती है. उन्होंने बताया इसके पीछे अपराधी की बदलती मनोस्थिति के साथ मौसम के साथ बदलती सामाजिक व पारिस्थितिक परिस्थिति भी जिम्मेदार है. उन्होने बताया कि गर्मी के मौसम में लूट और बलात्कार के अपराध ज्यादा होते है. इसके कारणों में उन्होंने बताया कि इस समय खेतों में फसल उत्पादन के बाद किसान अपनी फसल बेच कर लौटता है जो उसके लूट का कारण बनता है वहीं इसी समय खेतों में काफी संख्या में महिलाएं कटाई के लिये जाती है साथ ही तेज गर्मी में लोगों की आवाजाही भी नगण्य होती है जिससे अपराधी को बलात्कार के काफी अवसर मिलते है. इसी मौसम में महिला आत्महत्या की भी काफी घटनाएं होती है. उन्होने बताया कि ठीक इसी तरह बरसात की शुरुआत में जमीन मामलों के झगड़े काफी होते है इसकी बजह है कि बारिश के साथ ही बाड़ लगाने व खेत बोने के काम शुरू होते है और जमीन पर कब्जा झगड़े का कारण बनता है. उन्होंने बताया कि फरवरी मार्चतथा जुलाई अगस्त में गर्भपात की घटनाएं काफी होती है इसकी बजह में उन्होने कहा कि दिसंबर व जनवरी सेक्सुअल रिलेशन के लिये अच्छा मौसम माना जाता है तथा मई जून में बलात्कार ज्यादा होते है इसकी परिणति गर्भ ठहरने के रुप में होती है जिससे औसतन दो माह बाद गर्भपात के रूप में कारित किया जाता है. इस तरह अपराध शास्त्र के अनुसार हर मौसम के अपराध की प्रवृत्ति अलग-अलग होती है.

माहवार अपराधों की प्रवृत्ति -

भ्रूण हत्या - जनवरी,फरवरी,जून,जुलाई
हत्या और गंभीर अपराध - जुलाई
पारिवारिक हत्या - जनवरी, अक्टूबर
जमीन संबंधी अपराध - जुलाई, अगस्त
प्रौढ़ो में बलात्कार - जुलाई, अगस्त
युवकों में बलात्कार - मई, जून
संपत्ति के विरुद्ध अपराध - दिसम्बर,जनवरी
व्यक्ति के विरुद्घ अपराध - मई,जून

2 comments:

Satyendra Prasad Srivastava said...

अच्छी जानकारी दी है आपने। सचमुच पहले ये जानकारी नहीं थी।

सुनीता शानू said...

सचमुच बिल्कुल अजब जानकारी है..इस और तो हमारा ध्यान ही नही गया अब लग रहा है कि यह सच है मौसम से अपराध का गहरा सम्बंध है....जानकारी के लिये धन्यवाद।

सुनीता(शानू)